पंजाब में भी लाल नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का गलत इस्तेमाल

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संजय कालिया जालंधर (पंजाब)

 

हम लोग अकसर किसी भी कार की टैस्ट ड्राइव लेने जाते हैं तो देखा जाता है कि उस कार में लाल रंग की नंबर प्लेट लगी होती है और उस पर टी.सी. (ट्रेड सर्टीफिकेट) के साथ नंबर अंकित किया जाता है। यह उसी तरह है, जिस तरह से हमारी गाडिय़ों में राज्य के कोड के साथ-साथ नंबर जारी किया जाता है। टी.सी. नंबर प्लेट वाली गाडिय़ों में राज्य का कोड तो होता ही है, साथ में जिले का कोड तथा उसके बाद टी.सी. लिखकर नंबर जारी किया जाता है। यह नम्बर आर.टी.ओ. दफ्तर की तरफ से जारी होता है।यह नंबर प्लेट इन दिनों पंजाब पुलिस की नजरों में चढ़ गई हैं क्योंकि टी.सी. नंबर प्लेट के नाम पर कुछ राज्यों में बकायदा स्कैम पकड़ा गया है, जिसके बाद जालंधर सहित पंजाब के कई हिस्सों में इन नंबर प्लेटों वाले वाहनों की जांच तेज कर दी गई है। हाल ही में जालंधर में पुलिस ने टी.सी. नंबर वाली एक गाड़ी पकड़ी है, जिसे जब्त कर लिया गया है। यह गाड़ी जालंधर के पॉश इलाके में पुलिस के नाके के दौरान पकड़ी गई है। यह गाड़ी इसलिए पुलिस की जांच का विषय बन गई है क्योंकि गाड़ी नियमों के हिसाब से कुछ ज्यादा ही चल चुकी है।पुलिस सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि लाल नंबर प्लेट वाली टी.सी. गाडिय़ों के लिए विशेष नियम हैं, जिनकी पालना किया जाना जरूरी है। इन गाडिय़ों को सड़क पर चलाने के लिए जरूरी नियमों का पालना करना तो होता ही है, साथ ही गाडिय़ों के 10000 कि.मी. से ज्यादा होने पर अक्सर डीलर इन्हें या तो सेल कर देते हैं या फिर इन्हें टैस्ट ड्राइव की श्रेणी से बाहर कर दिया जाता है। जालंधर में जो गाड़ी पकड़ी गई, वह 10000 से ज्यादा कि.मी. चल चुकी है, लेकिन अभी भी टैस्ट ड्राइव की श्रेणी में चलाई जा रही है, जिसके कारण सवाल खड़े हो रहे हैं।