इंद्र समोसरण मे बैठकर जो अनुभूति होती है वह अनुभूति स्वर्गलोक मे भी

धर्म

प्रतिनिधि :अब्दुल रहमान राजस्थान बिजयनगर

शीत काल का प्रभाव है शीत काल में हर वस्तु छोटी होती है लेकिन आत्मा का विस्तार होता है उक्त विचार जैन भवन बिजयनगर में विराजमाब आचार्य श्री 108 विवेक सागर जी महाराज ने व्यक्त किये। संघस्थ सरिता दीदी, अर्चिता दीदी एवं सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष प्रभाचंद बड़जात्या के अनुसार आगे आचार्य महाराज ने कहा कि जीवन में यदि आत्मा का विस्तार नहीं कर पाए तो क्या फायदा संसार में सुख दुःख तो कारण मोह ममत्व भाव है इसी वजह से जीव निरन्तर संसार मे भ्रमण कर रहा है। मनुष्य अपनी सम्पूर्ण ऊर्जा क्षण भंगुर पदार्थों के संग्रह मे लगा देते हैं सारे जिंदगी भर उन वस्तुओ में लगा रहता है ज़ो वस्तुएँ किसी प्रयोजन की नहीं होती है पशुओं की चर्या अनियमित होती हैं वैसी स्थिति मनुष्य की हो गई। पैदा हुए और व्यापार सीखा अंत में धन परिवार के लिए छोड़ गए जीवन भर पाप करता रहा उससे इस जीव को क्या मिला ? यदि सबसे छोड़ने का नंबर आये तो क्या छोड़ते है पहले धर्म छोड़ते हैं और कहते हैं कि मुझे सुखी बनना है सुखी बनना है तो धर्म करना ही पड़ेगा लेकिन क्रियाये तो करता नहीं आचरण करता नहीं तो कैसे होगा? जीवन के लिए भेद विज्ञान करने के लिए ही मनुष्य पर्याय भी मिलती हैं स्वभाव में सरलता है तो मनुष्य पर्याय मिलेगी स्वभाव की कोमलता ही धर्म कार्य के लिए व्यक्ति को प्रेरित करती हैं परिणामों की विशुद्धि सहजता धर्म से होती है सुख का साधन धर्म परिणामों में सहजता कोमलता से आएगी तभी धर्म कार्य करने की प्रेरणा मिलती हैं। भगवान महावीर की अहिंसा एक है भगवान महावीर ने सभी के लिए एक उपदेश दिया है। आपके यहाँ समोशरण की रचना होगी धार्मिक अनुष्ठान करने का शुभ अवसर प्राप्त होगा। तीनो लोक के जीव चाहते हैं तो सुख अनभूति करने के लिए पूजन विधान से जुड़ने का प्रयास करें। अलौकिक आनंद आएगा स्वर्ग मे बैठा हुये इंद्र को समोसरण मे बैठकर जो अनुभूति होती है वह अनुभूति स्वर्गलोक मे भी नहीं मिलेगी आइए 31 दिसंबर से 3 जनवरी तक होगा सम्मिलित होकर पुण्य अर्जन करे। विराट कवि सम्मेलन भी 31दिसंबर की रात्रि मे 9बजे से होगा।

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