ड्रग तस्करों पर वर्धा पुलिस का सबसे बड़ा कानूनी प्रहार, पहली बार PITNDPS के तहत आरोपी स्थानबद्ध
ड्रग तस्करों पर वर्धा पुलिस का सबसे बड़ा कानूनी प्रहार, पहली बार PITNDPS के तहत आरोपी स्थानबद्ध
वर्धा.युसूफ पठाण
वर्धा जिले में बढ़ते नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ वर्धा पुलिस ने ऐतिहासिक और सख्त कार्रवाई करते हुए पहली बार अवैध मादक द्रव्यों एवं मनःप्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम, 1988 (PITNDPS) के तहत एक आदतन ड्रग तस्कर को स्थानबद्ध किया है।
इस संबंध में गुरुवार, 6 अगस्त को वर्धा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सदाशिव वाघमारे, पुलिस निरीक्षक विनोद चौधरी (स्थानीय अपराध शाखा) तथा उपविभागीय पुलिस अधिकारी हिंगणघाट नाईक ने जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि हिंगणघाट के टाका ग्राउंड निवासी राकेश उर्फ मुन्ना शिवदास जनबंधु के विरुद्ध एनडीपीएस अधिनियम के तहत 7 मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ बार-बार गिरफ्तारी और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बावजूद उसकी आपराधिक गतिविधियों में कोई सुधार नहीं आया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक वर्धा के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र शासन को प्रस्ताव भेजा गया।
प्रस्ताव पर विचार करते हुए महाराष्ट्र शासन के प्रधान सचिव (विशेष), गृह विभाग ने 6 अगस्त 2026 को आरोपी को PITNDPS अधिनियम के तहत स्थानबद्ध करने का आदेश जारी किया।
आदेश के बाद आरोपी को मध्यवर्ती कारागृह, अमरावती भेज दिया गया। वर्धा जिले में पहली बार हुई इस कार्रवाई को नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी कानूनी पहल माना जा रहा है।
अवैध मादक द्रव्यों एवं मनःप्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम, 1988 (PITNDPS) एक निवारक निरोध कानून है। इसका उद्देश्य अपराध होने के बाद केवल सजा देना नहीं, बल्कि ऐसे आदतन अपराधियों को भविष्य में मादक पदार्थों की तस्करी, बिक्री और अवैध नेटवर्क संचालित करने से रोकना है। यह कानून केवल उन मामलों में लागू किया जाता है, जहां पर्याप्त आधार हो कि आरोपी जमानत मिलने के बाद फिर से उसी प्रकार के अपराध में शामिल हो सकता है।
PITNDPS के तहत कार्रवाई सामान्य एफआईआर या गिरफ्तारी की तरह नहीं होती।
सबसे पहले पुलिस आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड, एनडीपीएस मामलों और उसकी गतिविधियों का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करती है। इसके बाद प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाता है। मंजूरी मिलने पर आरोपी को निवारक निरोध के तहत जेल भेजा जाता है।
उसकी हिरासत की वैधानिक समीक्षा सलाहकार बोर्ड द्वारा की जाती है। इस दौरान आरोपी को सामान्य जमानत प्रक्रिया से तत्काल राहत नहीं मिलती। इसी कारण PITNDPS को ड्रग तस्करों के खिलाफ सबसे प्रभावी कानूनी हथियार माना जाता है।