ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत: सांसद अमर काले
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत: सांसद अमर काले
मामूली कारणों से मरीजों को वर्धा रेफर करना उचित नहीं; बाघों के खतरे के बीच स्थानीय उपचार व्यवस्था पर जोर
आष्टी/वर्धा.प्रतिनिधि युसूफ पठाण
आष्टी करोड़ों रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की बड़ी-बड़ी इमारतें बनाई जा रही हैं और अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। लेकिन इन सुविधाओं का प्रभावी उपयोग मरीजों के इलाज के लिए नहीं हो रहा और मामूली कारणों से भी मरीजों को वर्धा या आर्वी रेफर किया जाता है, तो इतनी बड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या फायदा? यह सवाल सांसद अमर काले ने उठाया।
वे आष्टी तहसील के अंतोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। केंद्र का उद्घाटन राज्य मंत्री एवं वर्धा जिले के पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर के हाथों किया गया। कार्यक्रम में सांसद अमर काले भी उपस्थित थे।
7 करोड़ से अधिक की लागत से बना स्वास्थ्य केंद्र
अंतोरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण के लिए 7 करोड़ 2 लाख 7 हजार रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इस केंद्र से क्षेत्र की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। सांसद काले ने कहा कि केवल भव्य इमारत बनाना पर्याप्त नहीं है। केंद्र में डॉक्टर, नर्स और अन्य आवश्यक कर्मचारियों के साथ पर्याप्त दवाइयां, चिकित्सा उपकरण तथा जरूरी उपचार सुविधाएं उपलब्ध होना भी आवश्यक है।
45 में से 14 पद रिक्त
अंतोरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए कुल 45 पद मंजूर हैं। इनमें से 31 पद भरे गए हैं, जबकि 14 पद अभी भी रिक्त हैं। सांसद काले ने प्रशासन से इन रिक्त पदों को तत्काल भरने की मांग की। उन्होंने कहा कि 27 हजार से अधिक नागरिकों की स्वास्थ्य जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्र में पर्याप्त मनुष्यबल होना जरूरी है।
यह स्वास्थ्य केंद्र 27,735 नागरिकों, 6 उपकेंद्रों, 29 गांवों और 17 ग्राम पंचायतों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है। ऐसे में ग्रामीण नागरिकों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर उपचार उपलब्ध कराना आवश्यक है।
बाघों के खतरे के बीच आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा जरूरी
ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा भी गंभीर बना हुआ है। वन क्षेत्रों से सटे गांवों में बाघों की आवाजाही और हमलों की घटनाओं के कारण ग्रामीणों और किसानों में भय का वातावरण है। रायपुर के जंगल में बाघ के हमले में भगवान धुर्वे की मृत्यु की घटना का उल्लेख करते हुए सांसद काले ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में घायल व्यक्ति को तत्काल उपचार, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और जरूरत पड़ने पर तुरंत एम्बुलेंस उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बाघों के खतरे से निपटने के लिए वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ वन क्षेत्रों से लगे गांवों में स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन व्यवस्था भी मजबूत की जानी चाहिए।
रेफरल के बजाय स्थानीय उपचार को मिले प्राथमिकता
सांसद अमर काले ने कहा कि ग्रामीण नागरिकों को एक ओर जंगली जानवरों के खतरे का सामना करना पड़ रहा है, वहीं बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में उन्हें उपचार के लिए शहरों की ओर जाना पड़ता है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में करोड़ों रुपये खर्च कर सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद भी यदि मरीजों को छोटी-छोटी वजहों से वर्धा या आर्वी रेफर करना पड़े, तो इसका सबसे अधिक बोझ ग्रामीण नागरिकों पर पड़ता है। प्रशासन को उपलब्ध संसाधनों का पूरा उपयोग करते हुए स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक उपचार उपलब्ध कराने पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
सांसद काले ने उम्मीद जताई कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में रिक्त पदों की पूर्ति, आपातकालीन उपचार सुविधाओं को मजबूत करने तथा वन्यजीवों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाएगा।