अदालत का बड़ा झटका: ठाकुर का तबादला रद्द, मनोज गभने फिर बने सेलू थानेदार, अवैध कारोबार पर सख्ती के संकेत, प्रशासन में हलचल
अदालत का बड़ा झटका: ठाकुर का तबादला रद्द, मनोज गभने फिर बने सेलू थानेदार,अवैध कारोबार पर सख्ती के संकेत, प्रशासन में हलचल
प्रतिनिधि: राज शेख सेलू
सेलू: पुलिस स्टेशन में थानेदार पद के विवादित तबादले मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए देवेंद्र ठाकुर का तबादला रद्द कर दिया है।
साथ ही पुलिस निरीक्षक मनोज गभने को पुनः सेलू पुलिस थाने के प्रभारी (थानेदार) के रूप में बहाल करने के आदेश दिए गए हैं। इस फैसले के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है, वहीं अवैध कारोबार से जुड़े लोगों में डर का माहौल देखा जा रहा है।
बताया जाता है कि कुछ महीने पहले सेलू में थानेदार के रूप में कार्यरत मनोज गभने का अचानक तबादला कर दिया गया था, जबकि इसके पीछे कोई ठोस कारण सामने नहीं आया था। उनके स्थान पर देवेंद्र ठाकुर की नियुक्ति की गई थी। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए गभने ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
करीब चार महीने तक चली सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और संबंधित नियमों का बारीकी से अध्ययन किया। सुनवाई के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि गभने का तबादला नियमानुसार नहीं किया गया था। इसके आधार पर अदालत ने तबादला आदेश को निरस्त करते हुए उन्हें पुनः उनके पद पर बहाल करने का निर्देश दिया।
अदालत के इस फैसले से सेलू शहर में कानून-व्यवस्था को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ठाकुर के कार्यकाल में क्षेत्र में अवैध गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे में अब अवैध शराब बिक्री, मटका कारोबार और चोरी के डीजल-पेट्रोल के अवैध धंधों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
इस निर्णय ने अवैध तबादलों की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में चर्चा है कि अदालत के इस सख्त रुख से प्रशासन को स्पष्ट संदेश मिला है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।