अटॉर्नी से वकील बने एड. मनोज मिसाल का एड. बख़्श ने किया भावपूर्ण सत्कार
अटॉर्नी से वकील बने एड. मनोज मिसाल का एड. बख़्श ने किया भावपूर्ण सत्कार
नावेद पठाण मुख्य संपादक
हिंगणघाट : जीवन में परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि हौसला बुलंद हो, मेहनत करने का जज़्बा हो और संस्कारों की नींव मजबूत हो, तो अभावों के बीच से भी सफलता की राह निकाली जा सकती है। इसका प्रेरणादायी उदाहरण अधिवक्ता मनोज मिसाल ने प्रस्तुत किया है। अटॉर्नी के रूप में न्यायालयीन कार्य की शुरुआत करने वाले मनोज मिसाल ने अपनी मेहनत, लगन और निरंतर अध्ययन के बल पर एल.एल.बी. की शिक्षा पूर्ण कर अब स्वयं अधिवक्ता के रूप में न्यायालय में पैरवी शुरू की है।
मनोज मिसाल जब महज तीन माह के थे, तभी उनके सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार की जिम्मेदारी का पूरा भार उनकी मां के कंधों पर आ गया। आर्थिक परिस्थितियां अत्यंत कठिन थीं। मां ने स्वयं मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण किया और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। वे अपने बच्चों को भले ही धन-दौलत नहीं दे सकीं, लेकिन शिक्षा, संस्कार, आत्मसम्मान और ईमानदारी की जो पूंजी उन्होंने दी, वही आज मनोज मिसाल की सबसे बड़ी ताकत बनी है।
बचपन से लेकर युवावस्था तक मनोज ने अभावों और कठिनाइयों को बहुत करीब से देखा। कई बार आर्थिक परिस्थितियों के कारण मजदूरी और दिहाड़ी का काम भी करना पड़ा, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को कभी अपनी मंजिल के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने जो भी काम मिला, पूरी ईमानदारी और मेहनत से किया तथा इसके साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखी।
वर्ष 2015 में मनोज मिसाल ने न्यायालय में एक अधिवक्ता के अटॉर्नी के रूप में कार्य करना प्रारंभ किया। न्यायालयीन वातावरण में काम करते हुए उन्होंने कानून की बारीकियों को समझा और वकालत के प्रति उनकी रुचि तथा आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया। इसी दौरान उन्होंने एल.एल.बी. में प्रवेश लिया। काम और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने कानून की शिक्षा पूरी की और आज वे स्वयं अधिवक्ता के रूप में न्यायालय में उपस्थित होकर अपने पक्षकारों की ओर से पैरवी कर रहे हैं।
मनोज मिसाल के संघर्ष की विशेष बात यह है कि उन्होंने गरीबी और अभाव को केवल देखा ही नहीं, बल्कि स्वयं उसका सामना किया है। यही कारण है कि आज भी समाज के गरीब, जरूरतमंद और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सहायता करना वे अपना सामाजिक दायित्व मानते हैं। उनका मानना है कि कानून केवल पेशा नहीं, बल्कि न्याय और जरूरतमंदों की सहायता का माध्यम भी है।
अटॉर्नी से अधिवक्ता बनने की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर स्थानीय वरिष्ठ अधिवक्ता एड. इब्राहिम बख़्श ने अपने कार्यालय में एड. मनोज मिसाल को आमंत्रित कर उनका आत्मीय एवं भावपूर्ण सत्कार किया। इस अवसर पर उन्हें शॉल, श्रीफल एवं भेंटवस्तु प्रदान कर सम्मानित किया गया। एड. बख़्श ने मनोज मिसाल की संघर्षपूर्ण जीवनयात्रा, मेहनत, लगन और कानून के क्षेत्र में आगे बढ़ने की उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल एवं सफल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर एड. बख़्श ने कहा कि सच्ची सफलता वही है जो कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए हासिल की जाए। मनोज मिसाल ने अपने जीवन में यह सिद्ध कर दिखाया है कि आर्थिक अभाव किसी व्यक्ति की प्रतिभा और सपनों को रोक नहीं सकता। यदि मेहनत, ईमानदारी और संस्कार साथ हों तो व्यक्ति अपनी मंजिल अवश्य प्राप्त कर सकता है।
एड. मनोज मिसाल ने इस सम्मान के लिए एड. इब्राहिम बख़्श का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सफलता के पीछे उनकी मां के त्याग, संघर्ष और संस्कारों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि वे आगे भी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ वकालत करते हुए जरूरतमंद एवं गरीब लोगों को न्याय दिलाने का प्रयास करेंगे।
मनोज मिसाल की यह यात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष और सफलता की कहानी है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी संदेश है जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ने के बारे में सोचते हैं। उनका जीवन बताता है कि संघर्ष चाहे कितना भी बड़ा हो, मेहनत और हौसले के सामने मंजिल दूर नहीं रहती।