आर्वी उपजिला अस्पताल पर कांग्रेस और प्रहार का हल्लाबोल

Wed 09-Sep-2026,10:06 PM IST -07:00
Beach Activities

आर्वी उपजिला अस्पताल पर कांग्रेस और प्रहार का हल्लाबोल

रिक्त पद तत्काल भरने की मांग, सात दिन में समाधान नहीं तो जनआंदोलन की चेतावनी

आर्वी | प्रतिनिधि. युसूफ पठाण वर्धा 

आर्वी के उपजिला अस्पताल में कथित अव्यवस्थाओं को दूर कर रिक्त पदों को तत्काल भरने तथा अस्पताल को पुनः बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से सुसज्जित करने की मांग को लेकर कांग्रेस और प्रहार सोशल फोरम ने बाला जगताप के नेतृत्व में अस्पताल पर धावा बोला। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने चिकित्सा अधीक्षक को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए सात दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं होने पर बड़े जनआंदोलन की चेतावनी दी।

ज्ञापन में कहा गया है कि आर्वी शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए बना 50 बेड का उपजिला अस्पताल वर्तमान में अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। वर्ष 2018 से 2022 के दौरान यहां दो स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक बाल रोग विशेषज्ञ, एक सर्जन तथा दो एनेस्थेटिस्ट कार्यरत थे।

उस समय अस्पताल में प्रतिमाह लगभग 150 से 200 प्रसव, 30 से 35 सिजेरियन ऑपरेशन तथा 50 से 60 परिवार नियोजन शल्यक्रियाएं होती थीं। इसके अलावा हर महीने करीब 350 से 400 मरीज अस्पताल में भर्ती होकर उपचार प्राप्त करते थे। अस्पताल में ब्लड स्टोरेज यूनिट, डिजिटल एक्स-रे और ऑक्सीजन प्लांट जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध थीं।

2022 के बाद अस्पताल की व्यवस्था बिगड़ने का आरोप

कांग्रेस और प्रहार सोशल फोरम ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 के बाद उपजिला अस्पताल की व्यवस्था लगातार बिगड़ती गई। वर्तमान में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण प्रतिमाह केवल 10 से 15 प्रसव हो रहे हैं, जबकि सिजेरियन ऑपरेशन भी बेहद कम हो रहे हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ और एनेस्थेटिस्ट के नियमित एवं संविदा दोनों पद अभी तक रिक्त होने का आरोप लगाया गया है।

ज्ञापन में कहा गया है कि आर्वी में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद उनकी नियुक्ति नहीं की जा रही है। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ के पास चिकित्सा अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार होने के कारण मरीजों की जांच और भर्ती व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

एक्स-रे टेक्निशियन नहीं, सोनोग्राफी मशीनें बंद

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2023 से अस्पताल में नियमित वर्ग-1 चिकित्सा अधीक्षक नहीं है और प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक के माध्यम से कामकाज चल रहा है। अस्पताल में एक्स-रे टेक्निशियन उपलब्ध नहीं है। दो सोनोग्राफी मशीनें होने के बावजूद वे बंद पड़ी हैं।

ब्लड स्टोरेज यूनिट भी बंद होने तथा ऑक्सीजन प्लांट को कबाड़ में बेच दिए जाने का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा अस्पताल का कुछ सामान गायब होने की भी बात कही गई है।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि 50 बेड के अस्पताल को बढ़ाकर 100 बेड का किया गया, लेकिन इसके अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टरों और कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ाई गई। साथ ही आवश्यक दवाइयों की भी पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने का आरोप लगाया गया।

बाला जगताप ने कहा कि उपजिला अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले अधिकांश मरीज सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से होते हैं। ऐसे में उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलना जरूरी है। यदि सात दिनों के भीतर समस्याओं का ठोस समाधान नहीं किया गया तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।

ज्ञापन सौंपते समय बाला जगताप के साथ कांग्रेस के नगर पालिका विरोधी पक्ष नेता प्रा. पंकज वाघमारे, नगरसेवक गोविंद उईके, नगरसेविका प्रियंका भिमके, NSUI के वेदांत वानखेडे, ताराचंद नेहारे, संजय डोंगरे, हमीद हनीफ शेख, नूरखान, मोहम्मद शहजाद, प्रीति डोंगरे, अफजलभाई, गौतम चांदणे, संजय कुरिल, संदीप लोखंडे, प्रदीप जैन, चेतन गोडमारे, संतोष गौरकर, गुड्डू पठाण, धीरज गोरडे, जुम्मा शाह, तुषार मालोदे, प्रवीण येसणे, फारुक मिस्त्री, अमित खंडाते, नरेश कंगाले और विक्रम भगत सहित बड़ी संख्या में नागरिक एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।