वर्धा में बड़ा घोटाला! जिंदा कामगार महिला को सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ घोषित किया गया
वर्धा में बड़ा घोटाला! जिंदा कामगार महिला को सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ घोषित किया गया
वर्धा जिल्हा विशष प्रतिनिधि युसूफ पठाण
वर्धा | जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जीवित कामगार महिला को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। यह घटना सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रतापनगर स्थित बांधकाम कामगार संघटना कार्यालय से जुड़ा यह मामला सामने आया है। चानकी कोपरा क्षेत्र की निवासी अर्चना निलेशराव मेंढे ने बांधकाम कामगार योजना के अंतर्गत स्कॉलरशिप के लिए आवेदन किया था। आवेदन के बाद उनकी स्कॉलरशिप राशि स्वीकृत भी हो गई।
आरोप है कि राशि स्वीकृत होते ही विभाग से जुड़े एक एजेंट ने महिला से अवैध रूप से पैसों की मांग शुरू कर दी। पीड़िता के अनुसार, मजबूरी में उसने कुछ रकम दी, लेकिन इसके बावजूद एजेंट की मांग लगातार बढ़ती चली गई। जब महिला ने दोबारा पैसे देने से इनकार किया, तो कथित तौर पर उसे सरकारी रिकॉर्ड में “मृत” घोषित कर दिया गया।
हकीकत में महिला जीवित है, लेकिन दस्तावेजों में मृत दर्शाए जाने के कारण उसकी स्कॉलरशिप रोक दी गई है। इतना ही नहीं, अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी अब खतरे में पड़ गया है। पीड़िता ने इस पूरे मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की है और न्याय की मांग की है।
इस प्रकरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
क्या विभागों में एजेंटों का दबदबा बढ़ता जा रहा है?
सरकारी योजनाओं के नाम पर अवैध वसूली क्यों हो रही है?
किसी जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित करने की जिम्मेदारी किसकी है?
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार पर क्या कार्रवाई करता है।