जि.प.अध्यक्ष के पत्र को कार्यकारी अभियंता ने दिखाया आईना
प्रतिनिधि गुलशन बनोठे सालेकसा
मुंडन आंदोलन के बाद पिपरिया उपसरपंच गुणाराम मेहर की प्रतिक्रिया
सालेकसा-सालेकसा तालुका अंतर्गत महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्यों को मुख्य धारा से जोड़ने वाला सालेकसा वाया मुरूमटोला से गल्लाटोला तक का मुख्य मार्ग, विशेषकर मुरूमटोला से निंबा तक का 3.500 किमी सड़क मार्ग अत्यंत जानलेवा हो गया है. इस सड़क की तत्काल मरम्मत की जाए, अन्यथा जिला प्रशासन के विरोध में मुंडन आंदोलन, दशक्रिया (पिंडदान) आंदोलन, चौदवी (गंगापूजन) आंदोलन तथा अंत में रास्ता रोको (चक्का जाम) आंदोलन किया जाएगा—ऐसी चेतावनी भरा मांगपत्र पिपरिया के उपसरपंच गुणाराम मेहर द्वारा जिला परिषद अध्यक्ष गोंदिया को दिया गया था.इस मांगपत्र की दखल लेते हुए जिला परिषद अध्यक्ष ने जिला परिषद सार्वजनिक बांधकाम विभाग के कार्यकारी अभियंता को दिनांक 15/12/2025 को क्रमांक जिपगो/अध्यक्ष/स्वी-6/1104/2025 के अंतर्गत पत्र लिखकर आंदोलन की अवधि से पूर्व सड़क की मरम्मत करने के निर्देश दिए थे.इस पत्र की प्रतिलिपि माननीय जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं मांगकर्ता गुणाराम मेहर को भी भेजी गई थी.
मांग पूरी न होने के कारण दिनांक 01 जनवरी 2026 को गुणाराम मेहर ने अपने समर्थकों के साथ मुंडन आंदोलन किया.अब दिनांक 10 जनवरी 2026 को दशक्रिया (पिंडदान) आंदोलन, 14 जनवरी 2026 को चौदवी (गंगापूजन) आंदोलन तथा मजबूरीवश दिनांक 15 जनवरी 2026 को उक्त सड़क पर तंबू लगाकर अपने समर्थकों के साथ रास्ता रोको (चक्का जाम) आंदोलन करने की चेतावनी दी है.
हमारे प्रतिनिधि से बातचीत में गुणाराम मेहर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब लोकतंत्र खतरे में आ गया है.मुहजोर अधिकारियों के सामने जनप्रतिनिधि पूरी तरह बेबस हो गए हैं. अधिकारी जनप्रतिनिधियों के आदेशों का पालन नहीं कर रहे और खुलेआम उनके पत्रों को कचरे में फेंक रहे हैं। इस पर जनप्रतिनिधियों को गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता है, अन्यथा जनता का विश्वास जनप्रतिनिधियों से उठ जाएगा। इसके पीछे के कारण सभी को ज्ञात हैं, लेकिन कोई खुलकर बोल नहीं पा रहा है.
गुणाराम मेहर ने आगे कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी के एक निष्ठावान कार्यकर्ता हैं और उपसरपंच भी हैं, तथा उसी पार्टी के जिला परिषद अध्यक्ष भी हैं. यदि मुरूमटोला से निंबा सड़क की मरम्मत की मांग गलत है, तो जिला परिषद अध्यक्ष को स्वयं स्थल निरीक्षण करना चाहिए। यदि गुणाराम मेहर जैसे एक निष्ठावान कार्यकर्ता की मांग की अनदेखी की जा रही है, तो फिर एक साधारण कार्यकर्ता आखिर जाए तो किसके पास—ऐसी व्यथा उन्होंने व्यक्त की.