अवैध रेती का भंडाफोड़ करने पर पत्रकार को नोटिस; थाना प्रभारी की ओर से दबाव बनाने का आरोप

Mon 09-Feb-2026,02:13 AM IST -07:00
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*अवैध रेती का भंडाफोड़ करने पर पत्रकार को नोटिस; थाना प्रभारी की ओर से दबाव बनाने का आरोप*

नावेद पठाण मुख्य संपादक 

वर्धा : वर्धा जिले के सावंगी पुलिस थाना क्षेत्र से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है अवैध रेती के कारोबार का भंडाफोड़ किए जाने के बाद संबंधित पत्रकार को थाना प्रभारी की ओर से लीगल नोटिस भेजे जाने का आरोप लगाया गया है

*हालांकि, उक्त नोटिस का उत्तर पत्रकार ने अपने वकील के माध्यम से विधिवत रूप से दे दिया है*

इस पूरे घटनाक्रम को निष्पक्ष, निर्भीक और जिम्मेदार पत्रकारिता पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सावंगी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेती का उत्खनन और परिवहन लंबे समय से जारी है

ट्रैक्टरों के माध्यम से रेती की ढुलाई के वीडियो फुटेज और समाचार सार्वजनिक होने के बावजूद अब तक अवैध रेती माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इतना ही नहीं, क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री भी खुलेआम होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं

आरोप लगाया जा रहा है कि यदि समय रहते अवैध रेती माफियाओं और अवैध शराब कारोबार पर सख्त कार्रवाई की गई होती, तो पत्रकारों को इन गैरकानूनी गतिविधियों का पर्दाफाश करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। एक ओर अवैध कारोबार को लेकर कार्रवाई का अभाव और दूसरी ओर सच्चाई उजागर करने वाले पत्रकार को नोटिस भेजा जाना, पुलिस प्रशासन की भूमिका और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है

*लोकतंत्र में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ माना जाता है, जिसकी जिम्मेदारी सत्ता और व्यवस्था के कामकाज पर निगरानी रखने की होती है*

ऐसे में जब जनहित से जुड़े मुद्दों को उजागर करने वाले पत्रकारों पर दबाव बनाने के आरोप सामने आते हैं, तो यह न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी चिंता का विषय बन जाता है

*सच सामने लाना पत्रकार का कर्तव्य है, न कि अपराध*

अथवा पुलिस विभाग की प्रशंसा से जुड़ी खबरें प्रकाशित होती हैं, तब मीडिया को स्वीकार किया जाता है, लेकिन जैसे ही कोई पत्रकार जनहित में गलत कार्य, अवैध गतिविधि या प्रशासनिक चूक को उजागर करता है, तो उसे नोटिस भेजकर दबाव में लेने की कोशिश की जाती है। यह स्थिति स्वतंत्र पत्रकारिता पर सवाल खड़े करती है और दोहरी नीति को उजागर करती है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्धा जिले के पुलिस अधीक्षक श्री सौरभ कुमार अग्रवाल इस पूरे प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या अवैध रेती माफियाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है, या फिर निष्पक्ष पत्रकारिता को ही दबाव में लाने की कोशिश जारी रहती है