सोशल मीडिया पर चला स्वच्छता अभियान, ज़मीनी हकीकत में वर्धा शहर के हालात जस के तस
सोशल मीडिया पर चला स्वच्छता अभियान, ज़मीनी हकीकत में वर्धा शहर के हालात जस के तस
वर्धा | मुख्य संपादक नावेद पठाण
वर्धा शहर में स्वच्छ भारत अभियान को लेकर किए जा रहे दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर पूरे जोश-खरोश के साथ स्वच्छता अभियान चलाया गया। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के फोटो-वीडियो भी खूब वायरल हुए, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात आज भी वैसे ही बने हुए दिखाई दे रहे हैं।
शहर के कई हिस्सों में कचरे के ढेर अब भी जस के तस पड़े हुए हैं। सड़कों के किनारे, दीवारों के पास और खुली जगहों पर प्लास्टिक व घरेलू कचरा फैला हुआ है, जिससे दुर्गंध फैल रही है और नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि बेसहारा पशु इसी कचरे के बीच बैठने और वहीं से भोजन तलाशने को मजबूर हैं। प्लास्टिक और गंदा कचरा खाने से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
नगरपालिका द्वारा नियमित सफाई और कचरा उठाव के दावों के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा। नागरिकों का कहना है कि स्वच्छता अभियान केवल सोशल मीडिया तक सीमित रह गया है, जबकि वास्तविकता में शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
शहरवासियों और पशु प्रेमियों ने नगर परिषद प्रशासन से मांग की है कि दिखावटी अभियानों के बजाय नियमित और प्रभावी सफाई व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही कचरा प्रबंधन को सख्ती से लागू कर शहर को स्वच्छ रखने के साथ-साथ मूक पशुओं के जीवन की रक्षा के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएं।