सावंगी मेघे पुलिस की कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय पहुंचा ट्रैक्टर, अब सामान गायब होने का आरोप
सावंगी मेघे पुलिस की कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय पहुंचा ट्रैक्टर, अब सामान गायब होने का आरोप
चालू हालत में पहुंचा था वाहन; सेल्फ, साइलेंसर, फिल्टर और ट्रॉली की पिंज गायब होने से उठे गंभीर सवाल
नावेद पठाण मुख्य संपादक, वर्धा
वर्धा, वर्धा सावंगी मेघे पुलिस द्वारा कार्रवाई के दौरान जब्त किया गया एक ट्रैक्टर चालू हालत में तहसील कार्यालय परिसर तक पहुंचाए जाने के बाद उसके महत्वपूर्ण सामान के कथित रूप से गायब होने का मामला सामने आया है
ट्रैक्टर का सेल्फ खोलकर गायब किए जाने, इसके बाद साइलेंसर और ऊपर का फिल्टर गायब होने का आरोप लगाया जा रहा है इतना ही नहीं, ट्रैक्टर के साथ ट्रॉली जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण पिंज भी गायब होने की बात सामने आई है
बताया जा रहा है कि सावंगी मेघे पुलिस की कार्रवाई के बाद संबंधित ट्रैक्टर को तहसील कार्यालय में जमा कराया गया था। महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रैक्टर चालू कंडीशन में तहसील कार्यालय तक पहुंचा था। इसके बाद तहसील कार्यालय की निगरानी में वाहन रखे जाने के दौरान धीरे-धीरे उसके अलग-अलग हिस्से गायब होने का आरोप लगाया जा रहा है
पहले सेल्फ, फिर साइलेंसर और फिल्टर गायब होने का आरोप मिली जानकारी के अनुसार, ट्रैक्टर का सेल्फ खोलकर गायब किए जाने का आरोप है। इसके बाद ट्रैक्टर का साइलेंसर और ऊपर लगा फिल्टर भी गायब होने की बात सामने आई है। ये सभी ट्रैक्टर के महत्वपूर्ण हिस्से हैं
ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस कार्रवाई के बाद जब वाहन प्रशासन के कब्जे में था, तब इन सामानों की निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?
ट्रॉली की पिंज गायब होना भी गंभीर सवाल,मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात ट्रैक्टर-ट्रॉल को जोड़ने वाली पिंज को लेकर सामने आ रही है
ट्रैक्टर के साथ ट्रॉली जोड़ने के लिए यह हिस्सा आवश्यक होता है आरोप है कि यह पिंज भी अब मौके पर मौजूद नहीं है
यदि ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ तहसील कार्यालय तक पहुंचा था, तो ट्रॉली को जोड़ने वाली पिंज वहां से कैसे गायब हुई? यह सवाल पूरे मामले को और गंभीर बनाता है
पुलिस कार्रवाई से तहसील कार्यालय तक का रिकॉर्ड जांचना जरूरी अब इस पूरे मामले में सावंगी मेघे पुलिस की कार्रवाई से लेकर ट्रैक्टर के तहसील कार्यालय में जमा होने तक का रिकॉर्ड जांचना जरूरी हो गया है
वाहन जब्त करते समय उसकी स्थिति क्या थी? क्या पंचनामा तैयार किया गया था? उस समय ट्रैक्टर के कौन-कौन से पार्ट मौजूद थे? ट्रैक्टर को तहसील कार्यालय तक किसने पहुंचाया? कार्यालय में वाहन किस अधिकारी या कर्मचारी की निगरानी में रखा गया? इन सभी सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है
यदि वाहन चालू हालत में तहसील कार्यालय पहुंचा था, तो बाद में उसके सेल्फ, साइलेंसर, फिल्टर और ट्रॉली की पिंज गायब होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए
वाहन मालिक को सामान वापस कौन देगा?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जब्त वाहन तहसील कार्यालय की अभिरक्षा में था और उसके सामान गायब होने की बात सामने आती है, तो वाहन मालिक को उसका सामान कौन वापस करेगा? क्या तहसील प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेगा? या फिर वाहन मालिक को अपने ही वाहन के सामान के लिए अलग से शिकायत और कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी?
सरकारी कार्यालय में जब्त वाहन और संपत्ति रखे जाने के बाद उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन की होती है
इसलिए इस मामले में जब्ती के समय का पंचनामा, वाहन की मौजूदा स्थिति, तहसील कार्यालय में जमा करने का रिकॉर्ड और बाद की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण होगी
प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल मामला सामने आने के बाद तहसील प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि जब्त ट्रैक्टर की निगरानी किसके जिम्मे थी और वाहन के सामान का रिकॉर्ड किस रजिस्टर में दर्ज किया गया था। यदि सामान वास्तव में गायब हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए
फिलहाल, चालू हालत में तहसील कार्यालय पहुंचा ट्रैक्टर बाद में धीरे-धीरे अपने महत्वपूर्ण पार्ट्स से कैसे खाली होता गया? इस सवाल का जवाब प्रशासनिक जांच से ही सामने आ सकता है
मामले में निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और यदि किसी की लापरवाही या भूमिका सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है..