जिस रिश्ते पर दर्ज हुआ मामला, उसी रिश्ते को मिला विवाह का मुकाम

Sat 03-Oct-2026,10:47 PM IST -07:00
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जिस रिश्ते पर दर्ज हुआ मामला, उसी रिश्ते को मिला विवाह का मुकाम

पति-पत्नी बने, बेटे का हुआ जन्म; बदली परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही की रद्द

नावेद पठाण मुख्य संपादक, वर्धा 

नागपुर। वर्ष 2022 में जिस रिश्ते को लेकर दुष्कर्म, पॉक्सो और एट्रोसिटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया गया था, उसी रिश्ते का बाद में विवाह में परिणय हुआ। अब दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं और उनके एक पुत्र का भी जन्म हो चुका है। इन बदली हुई एवं विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने एफआईआर, आरोपपत्र तथा उससे संबंधित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति एम. डब्ल्यू. चांडवानी ने 29 सितंबर 2026 को क्रिमिनल एप्लिकेशन (APL) क्रमांक 2162/2026 में पारित किया। मामला वर्धा जिले के अल्लीपुर पुलिस थाने में दर्ज क्राइम नंबर 327/2022 तथा हिंगणघाट स्थित जिला न्यायाधीश-1 के समक्ष लंबित स्पेशल केस नंबर 30/2022 से संबंधित था।

आवेदकों की ओर से न्यायालय को बताया गया कि आवेदक क्रमांक 1 और संबंधित युवती के बीच प्रेम संबंध था। घटना के समय युवती की आयु 17 वर्ष 9 माह थी। बाद में दोनों ने विवाह कर लिया तथा उनके एक पुत्र का जन्म हुआ। वर्तमान में दोनों साथ रह रहे हैं और शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

सुनवाई के दौरान युवती अपने पुत्र के साथ न्यायालय में उपस्थित हुई। उसने अपने शपथपत्र में कहा कि वह आवेदक क्रमांक 1 के साथ प्रेम संबंध में थी, दोनों ने विवाह कर लिया है और वह अपने पति के साथ रह रही है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि वह आगे इस आपराधिक मामले की कार्यवाही जारी नहीं रखना चाहती तथा एफआईआर एवं संबंधित कार्यवाही रद्द किए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।

‘विशेष परिस्थितियों में ही पॉक्सो कार्यवाही रद्द की जा सकती है’

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सामान्यतः पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध की कार्यवाही को केवल पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जाता। हालांकि, वर्तमान मामले की विशेष परिस्थितियों में न्यायालय ने बदली हुई परिस्थितियों, दोनों के विवाह तथा उनके बच्चे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मामले पर विचार किया।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के Ayyub Malik बनाम State of Uttarakhand तथा K. Kirubakaran बनाम State of Tamil Nadu के निर्णयों का भी संदर्भ लिया। न्यायालय ने माना कि वर्तमान मामले की विशिष्ट परिस्थितियों में हाईकोर्ट की अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग किया जाना उचित है।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आवेदक क्रमांक 1 और संबंधित युवती अब विवाहित हैं, उनका एक बच्चा है और दोनों साथ रह रहे हैं। इन बदली हुई परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने आपराधिक कार्यवाही जारी रखने के प्रभाव पर विचार किया और कहा कि वर्तमान मामले में अंतर्निहित अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने का मामला बनता है।

एफआईआर और चार्जशीट रद्द

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने क्रिमिनल एप्लिकेशन मंजूर करते हुए अल्लीपुर पुलिस थाने में दर्ज क्राइम नंबर 327/2022 की एफआईआर तथा उससे संबंधित स्पेशल केस नंबर 30/2022 में दाखिल चार्जशीट एवं आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

आवेदकों की ओर से अधिवक्ता आक़ीद ज़ेड. मिर्ज़ा के साथ अधिवक्ता इब्राहिम बख्श ने पैरवी की। राज्य की ओर से एपीपी आई. जे. दामले तथा संबंधित पक्ष की ओर से अधिवक्ता क्यू. एम. एजाज़ रज़ा के साथ अधिवक्ता एन. मिर्ज़ा ने पक्ष रखा।